Dream Homes by SWAPNIL SAUNDARYA : Vol -04 , Year 2016 , Part - 1st




SWAPNIL   SAUNDARYA  e-zine 

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Dream Homes
Vol -04 , Year 2016 , Part - 1st






( From the Desk of Swapnil Saundarya ezine  )




स्वप्निल सौंदर्य ई-ज़ीन - परिचय 







कला , साहित्य,  फ़ैशन, लाइफस्टाइल व सौंदर्य को समर्पित भारत की पहली हिन्दी द्वि-मासिक हिन्दी पत्रिका के चतुर्थ चरण अर्थात चतुर्थ वर्ष में आप सभी का स्वागत है .

फ़ैशन व लाइफस्टाइल  से जुड़ी हर वो बात जो है हम सभी के लिये खास, पहुँचेगी आप तक , हर पल , हर वक़्त, जब तक स्वप्निल सौंदर्य के साथ हैं आप.

प्रथम, द्वितीय व तृतीय वर्ष की सफलता और आप सभी पाठकों के अपार प्रेम व प्रोत्साहन  के बाद अब स्वप्निल सौंदर्य ई-ज़ीन  ( Swapnil Saundarya ezine )   के चतुर्थ  वर्ष को एक नई उमंग, जोश व लालित्य के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है ताकि आप अपनी ज़िंदगी को अपने सपनों की दुनिया बनाते रहें. सुंदर सपने देखते रहें और अपने हर सपने को साकार करते रहें .तो जुड़े रहिये 'स्वप्निल सौंदर्य' ब्लॉग व ई-ज़ीन  के साथ .
और ..............
बनायें अपनी ज़िंदगी को अपने सपनों की दुनिया .
( Make your Life just like your Dream World )


Launched in June 2013, Swapnil Saundarya ezine has been the first exclusive lifestyle ezine from India available in Hindi language ( Except Guest Articles ) updated bi- monthly . We at Swapnil Saundarya ezine , endeavor to keep our readership in touch with all the areas of fashion , Beauty, Health and Fitness mantras, home decor, history recalls, Literature, Lifestyle, Society, Religion and many more. Swapnil Saundarya ezine encourages its readership to make their life just like their Dream World .

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Founder - Editor  ( संस्थापक - संपादक ) : 
Rishabh Shukla  ( ऋषभ शुक्ला )

Managing Editor (कार्यकारी संपादक) : 
Suman Tripathi (सुमन त्रिपाठी)

Chief  Writer (मुख्य लेखिका ) : 
Swapnil Shukla (स्वप्निल शुक्ला)

Art Director ( कला निदेशक) :
Amit Chauhan  (अमित चौहान)
Marketing Head ( मार्केटिंग प्रमुख ) :
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चेतावनी : 'स्वप्निल सौंदर्य - ई ज़ीन '  ( Swapnil Saundarya ezine )   में घरेलु नुस्खे, सौंदर्य निखार के लिए टिप्स एवं विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के संबंध में तथ्यपूर्ण जानकारी देने की हमने पूरी सावधानी बरती है . फिर भी पाठकों को चेतावनी दी जाती है कि अपने वैद्य या चिकित्सक आदि की सलाह से औषधि लें , क्योंकि बच्चों , बड़ों और कमज़ोर व्यक्तियों की शारीरिक शक्ति अलग अलग होती है , जिससे दवा की मात्रा क्षमता के अनुसार निर्धारित करना जरुरी है.







Dream Homes........
Vol -04 , Year 2016 , Part - 1st







 


लाएं खुशियों की सौगात ' फेंगशुई ' के साथ ::
Feng shui Accessories





फेंगशुई क्या है ? व इसका उपयोग हमारे जीवन को किस प्रकार प्रभावित कर सकता है ? यह ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर हर व्यक्ति जानना चाहता है क्योंकि आज की भाग दौड़ से भरी ज़िंदगी में हर कोई अपने जीवन को खुशहाल, आरामदायक व समृ्द्ध बनाना चाहता है. तो आइये सबसे पहले जानते है कि फेंगशुई है क्या?

' फेंगशुई ' चीन की  एक प्राचीन कला व विज्ञान है जो कि कुछ 6000 वर्ष पूर्व लोगों के सामने आई. फेंगशुई चीनी भाषा के दो शब्द ' फेंग ' और ' शुई ' से मिलकर बना है . जिसमें फेंग का अर्थ है ' जल ' और शुई का अर्थ है ' वायु ' . फेंगशुई  वातावरण, स्थान, उस स्थान में रहने वाले लोग , समय व इन सभी ऊर्जाओं का एक दूसरे पर क्या प्रभाव पड़ता है, इस पर आधारित है.

फेंगशुई एक ऐसी कला व विज्ञान है जिसके द्वारा हम हमारे आस पास के वातावरण व विभिन्न  ऊर्जाओं  के बीच सही संतुलन बनाकर एक खुशहाल व आरामदायक स्थान की रचना कर सकते हैं.
भारतीय वास्तु शास्त्र व फेंगशुई में थोड़ा अंतर है. यह भारत व चीन की जलवायु में अंतर के कारण है . भारतीय वास्तु पंचतत्व अर्थात अग्नि, वायु, जल, आकाश व पृ्थ्वी व आठ दिशाओं पर आधारित है व फेंगशुई के अंतर्गत जिन पंचतत्वों को प्रधानता दी गई है वे हैं - काष्ठ, अग्नि, पृ्थ्वी, धातु व जल.

फेंगशुई में  हमें यह छूट होती है कि यदि किसी स्थान में वास्तु दोष है और उस स्थान में तोड़ - फोड़ संभव न हो तो हम फेंगशुई के द्वारा उस स्थान को विशेष प्रकार की एक्सेसरीज़ जैसे विंड चाइम्स, शीशे, ड्रैगन, क्रिस्टल इत्यादि का प्रयोग करके वास्तु दोष के असर को बहुत हद तक सुधार सकते हैं.
चाहें भारतीय वास्तु शास्त्र हो या फेंगशुई दोनों ही विद्याओं का मूल उद्देश्य है हमारे आसपास के वातावरण  और हमारे जीवन में  सामंजस्य स्थापित कर एक सुखद संतुलन स्थापित करें जो हमें नाना प्रकार के उपद्रवों से बचाएं .

फेंगशुई के अंतर्गत 'ची' की बहुत अधिक महत्ता है . फेंगशुई के अनुसार 'ची ' एक अदृ्श्य शक्ति है जो सभी सजीव व निर्जीव पदार्थों में पायी जाती है . जो मुख्यत: दो प्रकार की होती है - प्राणवान ची व निष्प्राण ची . प्राणवान ची सकारात्मक व शुभ होती है व निष्प्राण ची नकारात्मक व दुष्परिणाम लाती है.

आइये ........ अब जानते हैं फेंगशुई की कुछ लाभदायक एक्सेसरीज़ के बारे में जिनको आप अपने निवास स्थान पर लगा के लाभ उठा सकते हैं.

1. ड्रैगन :  ड्रैगन ऊर्जा का प्रतीक है . अत: दुकान , कार्यालय , होटल आदि स्थानों में इसको पूर्व दिशा में लगाने से लाभ होता है .

2- तीन चीनी सिक्के : घर में सौभाग्य , संपत्ति लाने के लिए मुख्य द्वार के हैंडल पर घर के अंदर की तरफ , इनको लाल रंग के फीते से बाँध कर लटकाएं.

3- अष्ट्कोणीय दर्पण :  यदि आपके मुख्य द्वार के सामने सीधी सड़क, पेड़, दीवार या अन्य प्रकार की रुकावट हो तो दोष निवारण के लिए मुख्य द्वार के ऊपर घर के बाहर अष्ट्कोणीय दर्पण लगाएं.

4- हँसता हुआ बुद्धा { लाफिंग बुद्धा } : खुशहाली व धन- दौलत का प्रतीक है. इसको यदि घर की तिजोरी में रखा जाए तो धन में तेजी से वृ्द्धि होती है.

5- विंड चाइम्स  { पवन -घंटी } : ये मुख्यत: शांति व खुशियों का प्रतीक है . पाँच छड़ वाले विंड चाइम्स को अध्ययन कक्ष में लगायें. छ: छ़ड़ वाले विंड चाइम्स को ड्राइंग रुम में लगायें . सात छड़ वाले विंड चाइम्स को बच्चों के कमरे में लटकाना चाहिये . आठ छड़ वाले विंड चाइम्स का प्रयोग कार्यालय में करें तो बेहतर परिणाम देखने को मिलते हैं. नौ छड़ वाले विंड चाइम्स को अगर ड्राइंग रुम में लगाएं तो निराशा का अंत होता है .

6- क्रिस्टल ग्लोब या एजुकेशन टॉवर : व्यापार व कैरियर निर्माण में बेहतर परिणाम के लिए इनका प्रयोग किया जाता है . क्रिस्टल ग्लोब को दिन में तीन बार घुमाना चाहिये.

7- लुक, फुक, साऊ :  यह चीनी देवताओं की मूर्ति है जो सौभाग्य का प्रतीक होती है . इन्हें घर पर किसी भी शुद्ध स्थान पर स्थापित करने से सुखद परिणाम दृ्ष्टि गोचर  होते हैं.परंतु इस बात का विशेष  ध्यान दे कि इन तीनों देवताओं को घर में एक साथ रखा जाए.

8- लव बर्डस :  इनको शयनकक्ष में दक्षिण- पश्चिम कोने पर रखा जाना चाहिये. लव बर्डस जीवन में प्रेम -पूर्ण सामंजस्य स्थापित करने में मदद करते हैं .

9- दर्पण : परिवार की सुख - समृ्द्धि व स्वस्थ जीवन के लिए दर्पण को भोजनकक्ष में ऐसे स्थान पर लगायें जहाँ भोजन करते समय प्रतिबिंब दिखाई दे.

10- एक्वेरियम : घर में एक छोटे से एक्वेरियम में सुनहरी मछलियाँ पालना, सौभाग्य वर्धक होता है .ध्यान रहे कि एक्वेरियम में आठ मछलियाँ सुनहरी और एक काले रंग की होनी चाहिये . इसको मुख्य द्वार के समीप न रखें.

11- बैटल विद डेथ : यदि आपके घर में कोई लंबे समय से बिमार है तो इसे उसके बिस्तर के पास रखने से विभिन्न प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है.

12- स्फटिक श्री यंत्र / स्फटिक पिरामिड/ क्रिस्टल बॉल :  इसको ईशान या उत्तर दिशा में रखने से कार्यक्षमता बढ़ती है व व्यवसाय में चमत्कारी वृ्द्धि होती है.







दर्पण से उठायें लाभ , फेंगशुई के साथ ::
Mirror and Feng shui







आज के परिवेश में लोग अपने आस - पास के वातावरण को शाँतिपूर्ण , आरामदायक , सुगम व आकर्षक बनाने के लिए हर संभव प्रयास में लगे रहते हैं. इस कड़ी में फेंगशुई की यदि बात करें तो यह एक ऐसी विद्या है जिसके द्वारा आवासीय व व्यवसायिक स्थान के वातावरण में सही सामंजस्य स्थापित कर व्यक्ति सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित कर एक खुशहाल व सुचारु जीवनशैली को अपना सकता है. फेंगशुई का तात्पर्य है जल व वायु . यह चीन की एक प्राचीन कला व विज्ञान है जो हमारे आस- पास के वातावरण में विद्यमान ऊर्जाओं के बीच सही संतुलन स्थापित कर एक बेहतरीन स्थान की रचना करने में सहायक होती है.

आज भवन निर्माण में लोग फेंगशुई को अपनाकर अनेक चमत्कारी प्रभावों से लाभान्वित हो रहे हैं. फेंगशुई के अंतर्गत वास्तुदोष मिटाने के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले उपाय बेहद सरल व सुगम होते हैं. आइये इस संदर्भ में जानते हैं फेंगशुई के अंतर्गत ' दर्पण ' की उपयोगिता व किस प्रकार दर्पण के द्वारा हम हमारे आस- पास के वातावरण को सकारात्मक ऊर्जाओं से परिपूर्ण कर सकते हैं. फेंगशुई के अंतर्गत दर्पण का अर्थ वे समस्त चमकीली वस्तुएं हैं जिनमें हम प्रतिबिम्ब देख सकें, जैसे शीशा, ग्रेनाइट पत्थर आदि. दर्पण के सही तरीके की उपयोग द्वारा शुभ ऊर्जाओं के प्रवाह को बढाया जा सकता है . तो आइये जानते हैं दर्पण के कुछ समृ्द्धि कारक प्रयोगों के बारे में :-

* भवन के ईशान क्षेत्र अर्थात उत्तर- पूर्व दिशा में यदि दर्पण स्थापित करा जाए तो आय वृ्द्धि में लाभ होता है.

* यदि शो- रूम या दुकान की छत पर दर्पण लगा रहे हैं तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि छत के ईशान व मध्य क्षेत्र पर दर्पण न लगाएं.

* भवन में दक्षिण - पश्चिम अर्थात्त नेऋत्य , दक्षिण - पूर्व ( आग्नेय ) व उत्तर- पश्चिम ( वायव्य ) दिशा में दर्पण कदापि न लगाएं. यदि इन दिशाओं में दर्पण लगे हैं और हटाना संभंव न हो तो इन्हें ढक कर रखें.

* फेंगशुई के अनुसार किचिन में काम करने वाले व्यक्ति को किचिन में आने जाने वाले लोगों को देखने में कोई अड़्चन नहीं होनी चाहिये . यदि ऐसा संभव न हो तो स्टोव  के पास दर्पण लगवाएं ताकि उससे दरवाज़ा दिखाई देता रहे व आने - जाने वाले लोगों की जानकारी मिलती रहे.

*दर्पण को भोजन कक्ष में ऐसे स्थान पर लगाएं जहाँ भोजन करते समय प्रतिबिंब दिखाई देता रहे. यह परिवार की सुख- समृ्द्धि व स्वस्थ जीवन के लिए अचूक उपाय है.

*शयनकक्ष में बेड के पायताने के सम्मुख दर्पण न लगाएं क्योंकि रात में नींद से अचानक आँख्ह खुलने पर व्यक्ति स्वयं का प्रतिबिंब देखकर भ्रमित या चौंक सकता है.

*शयन कक्ष में गोल दर्पण को स्थान दें.

*दर्पणों को सदैव साफ- सुथरा रखें अन्यथा नकारात्मक परिणाम दृ्ष्टिगोचर हो सकते हैं.

*भवन के मुख्य प्रवेशद्वार के सामने प्रसाधन कक्ष नहीं होना चाहिये. यदि ऐसा हो तो प्रसाधन कक्ष के दरवाज़े पर एक दर्पण लगाएं और उस दरवाजे को सदैव बंद रखें.

*कमरे में यदि कोई लटकती हुई बीम है तो उसके नीचे किसी भी प्रकार का फर्नीचर न हो पर यदि ऐसी स्थिति में फर्नीचर हटा पाना संभव न हो तो बीम के नीचे दर्पण लगा के दोष के नकारात्मक प्रभाव को खत्म किया जा सकता है.

*कमरे के फर्नीचर कभी भी इस प्रकार व्यवस्थित न करें कि उनके पीछे खिड़की या दरवाज़ा हो . यदि ऐसा संभव न हो तो उस फर्नीचर के सामने वाली दीवार पर दर्पण लगाएं ताकि दर्पण की सहायता से फर्नीचर पर बैठा व्यक्ति उसके पीछे दरवाज़े से आने- जाने वाले को आसानी से देख सकें.





वास्तु शास्त्र और आप
Vastu and You







वास्तु शास्त्र का क्षेत्र काफी विस्तृ्त है . नि: संदेह इस विद्या का मूल उद्देश्य मानव जीवन में सुख, शांति , सुगमता व सौहार्द लाना है. आज लगभग हर व्यक्ति अपने घर का निर्माण वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुरुप ही करवाना पसंद करते है .वास्तु शास्त्र के बारे में जब भी कोई बात हमारे सामने आती है तो सबसे पहले विचार यही आता है कि आखिर किस तरीके से हम अपने घर व व्यापार में वास्तु सा सही प्रयोग कर लाभ उठा सकते हैं. तो आइये सबसे पहले इस संदर्भ में जानते है कि वास्तु शास्त्र है क्या ? और ये किस प्रकार हमारे जीवन पर प्रभाव डालता है?

वास्तु शास्त्र एक प्राचीन कला व विज्ञान है जिसके अंतर्गत किसी भी स्थान के उचित निर्माण से संबंधित वे सब नियम आते हैं जो मानव और प्रकृ्ति के बीच सामंजस्य बैठाते हैं जिससे हमारे चारों ओर खुशियाँ, संपन्नता , सौहार्द व स्वस्थ वातावरण का निर्माण होता है.

वास्तु शास्त्र की रचना पंचतत्व अर्थात धरती, आकाश , वायु , अग्नि, जल व आठ दिशाओं के अंतर्गत होती है.

अपने घर को सही वास्तु शास्त्र के अनुसार सुनियोजित करने के लिए दिशाज्ञान यंत्र अर्थात कम्पास का प्रयोग करें ताकि घर की सही दिशाओं का ज्ञान हो सके.

सबसे पहले घर के पूजा कक्ष अर्थात मंदिर की बात करें तो इसको घर के उत्तर पूर्व { ईशान } दिशा मेम बनवाना चाहिये. अब प्रश्न यह उठता है कि मंदिर के अंदर की आठ दिशाओं की क्या व्यवस्था होनी चाहिये?
ईश्वर की मूर्ति पश्चिम या पूर्व दिशा में स्थापित करनी चाहिये. मंदिर की ईशान { उत्तर पूर्व } दिशा पूजा करने के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थल होता है.

पूजा कक्ष के बाद बात करते हैं शयन कक्ष की . घर के मुखिया के लिए दक्षिण - पश्चिम { नैऋत्य } दिशा का शयन कक्ष बेहतर होता है. मुखिया के बाद घर के बड़े सदस्य को दक्षिण - पूर्व व उसके बाद के सदस्य को उत्तर- पश्चिम दिशा में शयन कक्ष बनवाना चाहिये. बच्चों के लिए उत्तर- पूर्व दिशा में बनवाया गया शयन कक्ष  बेहतर रहता है.
शयन कक्ष के अंदर बिस्तर को या तो कमरे के मध्य में रखें या फिर कमरे की दक्षिण - पश्चिम हिस्से में लगायें क्योंकि वास्तु शास्त्र के अनुसार दक्षिण - पश्चिम हिस्सा सदैव भारी होना चाहिये . बिस्तर कभी भी उत्तर व पूर्व दिवारों से सटा न हो . शयन कक्ष में पुस्तकों की अलमारी आदि दक्षिण - पश्चिम या पश्चिम दिशा में रखें . स्टडी टेबल  व चेयर भी इसी दिशा में रखना शुभ माना जाता है. यदि शयन कक्ष में हम टी. वी व अन्य बिजली के उपकरणों का प्रयोग कर रहे हैं तो इनको दक्षिण - पूर्व { आग्नेय } दिशा में लगायें.
अब हम बात करते हैं बाथरुम की . बाथरुम को घर के उत्तर - पश्चिम कोने में बनवायें. बाथरुम के अंदर ईशान { उत्तर - पूर्व } दिशा में शॉवर या नल लगवाएं . बाथरुम के ईशान क्षेत्र में  कभी भी ड्ब्ल्यू. सी ( W.C. )  न लगवाएं . शीशा सदैव पूर्व दिशा में लगाएं. ड्ब्ल्यू . सी को उत्तर - पश्चिम { वायव्य } क्षेत्र में लगवाएं. गंदे कपड़ों को पश्चिम दिशा में रखें.  यदि कोई अलमारी हो तो उसे दक्षिण - पश्चिम क्षेत्र में रखें. गीजर, हीटर व अन्य बिजली के उपकरणों को दक्षिण - पूर्व { आग्नेय } दिशा में लगवाएं. बाथरुम का प्रवेश उत्तर या पूर्व में रखें.

आइए अब हम बात करते हैं किचन अर्थात रसोईघर की . किचन को घर के दक्षिण - पूर्व { आग्नेय } दिशा में बनवाना चाहिये. यदि घर का प्रवेश द्वार पूर्व या दक्षिण में हो तो आप किचन को उत्तर - पश्चिम { वायव्य } दिशा में स्थापित करें. खाना बनाने की वर्किंग प्लेट्फार्म को पूर्व दिशा में होना चाहिये क्योंकि खाना बनाते समय यदि खाना बनाने वाले का मुँह  पूर्व दिशा में हो तो शुभ माना जाता है. किचन के सिंक को उत्तर - पूर्व { ईशान } दिशा में होना चाहिये . ऐसी मान्यता है कि उत्तर पूर्व दिशा में पानी का प्रवाह बेहद शुभ होता है. किचन में सिलेंडर को दक्षिण - पूर्व { आग्नेय } दिशा में रखें. गीजर व अन्य बिजली के उपकरणों को भी दक्षिण - पूर्व { आग्नेय } दिशा में लगवाएं . किचन के बर्तन , खाने का सामान , अलमारी आदि को दक्षिण व पश्चिम दिशाओं में बनवायें. फ्रिज को उत्तर- पश्चिम क्षेत्र में रखें.
वास्तु शास्त्र हमारे प्राचीन इतिहास की एक अनमोल देन है. वास्तु शास्त्र के नियमों पर आधारित बने हुए मकान उस घर में रहने वाले सदस्यों के लिए सदैव खुशहाली, संपन्नता, सुख व शांति लाते हैं . वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुरूप की गई आंतरिक साज- सज्जा , वस्तुओं का सही दिशानुसार रख -रखाव आदि द्वारा हम हमारे घर में सकारात्मक ऊर्जाओं को आमंत्रित करके अनेकों प्रकार से लाभ उठा सकते हैं और अपने जीवन को एक खूबसूरत व सुखद आयाम दे सकते हैं .


 - ऋषभ शुक्ल ( Rishabh Shukla )
इंटीरियर डिज़ाइनर ( Interior Designer )
वास्तु एवं फेंग शुई कंसलटेंट ( Vastu & Feng shui Consultant )




The home of your Dreams :: by Rishabh Shukla







Contemporary Interiors   :: by Rishabh Shukla









 
About Rishabh Shukla 


Rishabh Shukla is an Indian freelance Interior Designer, Artist and Design Entrepreneur, studied at the renowned INIFD ( International Institute of Fashion Design ), Delhi in 2006 , having 8 years of work experience. He specializes in Interior Design Journalism and beaux arts. Rishabh has worked in the design Industry since 2007 in the areas like Interior Design , Art & Colour Consultancy , Retail Design & Visual Merchandising , Art Appreciation, Product Designing, Writing & Design blogging . Rishabh created a business for himself in this niche market as an Interior Design Writer and Principal Designer of Rishabh Interiors & Arts ( est. 2013 ) collaborating with his clients to create beautiful living places and working freelance as an Interior Design Writer and Painter is a dream realized for Rishabh .He has held many Art Exhibitions throughout the country.Rishabh has also authored two books on Interiors namely ' Ek Aashiyane ki oar  A guide for Residential Interiors' and ' Supreme Home Therapy ' .
In the words of Rishabh, “Interior Design is an art & I keep it in that way......a living space is a reflection of one's inner story,easier told in colour & texture than words”.
" My Art work whether it is a Painting ,Sculpture or a Furniture has life and identity of its own ",  he added.
Currently , he is working as Marketing Head and Design Consultant of Swapnil Saundarya Label which is a designer lifestyle products manufacturing firm , with a motive to make everybody's life just like their dream world.
Rishabh is known for remodeling and revamping interiors without major breaking and restructuring but doing a soft revamp make over where an entire new look is created in a matter of days without stress to the client , like a grooming job upon a man or a woman , a re-colour , re- dress of the home/ office/ showroom ! He specializes in quick make overs of homes that entail short quick re- vamps that eschews breaking and major re- modelling .This image makeover is his forte for homes, offices or retail spaces  and he is concentrating on it extensively in this age where people are not keen or do not have the time and often finance to do complete remodelling .Minimalism with an edge of occasional whimsy is his signature style and to re-invent a space merged with ancient practices like Vastu and Feng- shui is his forte.

Rishabh says, " I am an aesthete , a lover of fine, applied and liberal arts and a professional Interior Designer. I have worn several hats as Interior Designer, Vastu Consultant, Painter , Columnist and Author . I enjoyed painting and writing like a picturesque journey. For me,design, shapes and forms were attractive since I was three or may be before even , I almost cannot see a space or fabric or canvas without my mind and vision clicking with ideas to enhance it to its aesthetic function in accordance with my vision .I believe that our home is a canvas of our thoughts so its best to colour it with beautiful paintings ." Rishabh's earliest memories of wanting to design were as a young child by trying to design homes and offices for him and his friends .He has always had love for architecture and art and when all the other little boys were playing cricket , he was busy designing his dream home and conceptualising his dream art collection. Fast forwarding several years Rishabh gained a Diploma in Interior Design and has utilized his 8 plus years of experience to every aspect of design in remodelling and new home construction . From layout and finishes , to project management and art consultancy , he has provide design and art consultancy to various clients and professionals .

Rishabh is also a Freelance Design Writer and has  authored two books on Interiors namely Ek Aashiyane ki oar - A guide for Residential Interiors  ( Pub. 2012 ) and Supreme Home Therapy ( Pub. 2014 ).













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