लाएं खुशियों की सौगात ' फेंगशुई ' के साथ .



लाएं खुशियों की सौगात ' फेंगशुई ' के साथ ........




फेंगशुई क्या है ? व इसका उपयोग हमारे जीवन को किस प्रकार प्रभावित कर सकता है ? यह ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर हर व्यक्ति जानना चाहता है क्योंकि आज की भाग दौड़ से भरी ज़िंदगी में हर कोई अपने जीवन को खुशहाल, आरामदायक व समृ्द्ध बनाना चाहता है. तो आइये सबसे पहले जानते है कि फेंगशुई है क्या?

' फेंगशुई ' चीन की  एक प्राचीन कला व विज्ञान है जो कि कुछ 6000 वर्ष पूर्व लोगों के सामने आई. फेंगशुई चीनी भाषा के दो शब्द ' फेंग ' और ' शुई ' से मिलकर बना है . जिसमें फेंग का अर्थ है ' जल ' और शुई का अर्थ है ' वायु ' . फेंगशुई  वातावरण, स्थान, उस स्थान में रहने वाले लोग , समय व इन सभी ऊर्जाओं का एक दूसरे पर क्या प्रभाव पड़ता है, इस पर आधारित है.





फेंगशुई एक ऐसी कला व विज्ञान है जिसके द्वारा हम हमारे आस पास के वातावरण व विभिन्न  ऊर्जाओं  के बीच सही संतुलन बनाकर एक खुशहाल व आरामदायक स्थान की रचना कर सकते हैं.


भारतीय वास्तु शास्त्र व फेंगशुई में थोड़ा अंतर है. यह भारत व चीन की जलवायु में अंतर के कारण है . भारतीय वास्तु पंचतत्व अर्थात अग्नि, वायु, जल, आकाश व पृ्थ्वी व आठ दिशाओं पर आधारित है व फेंगशुई के अंतर्गत जिन पंचतत्वों को प्रधानता दी गई है वे हैं - काष्ठ, अग्नि, पृ्थ्वी, धातु व जल.

फेंगशुई में  हमें यह छूट होती है कि यदि किसी स्थान में वास्तु दोष है और उस स्थान में तोड़ - फोड़ संभव न हो तो हम फेंगशुई के द्वारा उस स्थान को विशेष प्रकार की एक्सेसरीज़ जैसे विंड चाइम्स, शीशे, ड्रैगन, क्रिस्टल इत्यादि का प्रयोग करके वास्तु दोष के असर को बहुत हद तक सुधार सकते हैं.
चाहें भारतीय वास्तु शास्त्र हो या फेंगशुई दोनों ही विद्याओं का मूल उद्देश्य है हमारे आसपास के वातावरण  और हमारे जीवन में  सामंजस्य स्थापित कर एक सुखद संतुलन स्थापित करें जो हमें नाना प्रकार के उपद्रवों से बचाएं .

फेंगशुई के अंतर्गत 'ची' की बहुत अधिक महत्ता है . फेंगशुई के अनुसार 'ची ' एक अदृ्श्य शक्ति है जो सभी सजीव व निर्जीव पदार्थों में पायी जाती है . जो मुख्यत: दो प्रकार की होती है - प्राणवान ची व निष्प्राण ची . प्राणवान ची सकारात्मक व शुभ होती है व निष्प्राण ची नकारात्मक व दुष्परिणाम लाती है. 





 

आइये ........ अब जानते हैं फेंगशुई की कुछ लाभदायक एक्सेसरीज़ के बारे में जिनको आप अपने निवास स्थान पर लगा के लाभ उठा सकते हैं.
1. ड्रैगन :  ड्रैगन ऊर्जा का प्रतीक है . अत: दुकान , कार्यालय , होटल आदि स्थानों में इसको पूर्व दिशा में लगाने से लाभ होता है .

2- तीन चीनी सिक्के : घर में सौभाग्य , संपत्ति लाने के लिए मुख्य द्वार के हैंडल पर घर के अंदर की तरफ , इनको लाल रंग के फीते से बाँध कर लटकाएं.

3- अष्ट्कोणीय दर्पण यदि आपके मुख्य द्वार के सामने सीधी सड़क, पेड़, दीवार या अन्य प्रकार की रुकावट हो तो दोष निवारण के लिए मुख्य द्वार के ऊपर घर के बाहर अष्ट्कोणीय दर्पण लगाएं.

4- हँसता हुआ बुद्धा { लाफिंग बुद्धा } : खुशहाली व धन- दौलत का प्रतीक है. इसको यदि घर की तिजोरी में रखा जाए तो धन में तेजी से वृ्द्धि होती है.

5- विंड चाइम्स  { पवन -घंटी } : ये मुख्यत: शांति व खुशियों का प्रतीक है . पाँच छड़ वाले विंड चाइम्स को अध्ययन कक्ष में लगायें. छ: छ़ड़ वाले विंड चाइम्स को ड्राइंग रुम में लगायें . सात छड़ वाले विंड चाइम्स को बच्चों के कमरे में लटकाना चाहिये . आठ छड़ वाले विंड चाइम्स का प्रयोग कार्यालय में करें तो बेहतर परिणाम देखने को मिलते हैं. नौ छड़ वाले विंड चाइम्स को अगर ड्राइंग रुम में लगाएं तो निराशा का अंत होता है .

6- क्रिस्टल ग्लोब या एजुकेशन टॉवर : व्यापार व कैरियर निर्माण में बेहतर परिणाम के लिए इनका प्रयोग किया जाता है . क्रिस्टल ग्लोब को दिन में तीन बार घुमाना चाहिये.

7- लुक, फुक, साऊ :  यह चीनी देवताओं की मूर्ति है जो सौभाग्य का प्रतीक होती है . इन्हें घर पर किसी भी शुद्ध स्थान पर स्थापित करने से सुखद परिणाम दृ्ष्टि गोचर  होते हैं.परंतु इस बात का विशेष  ध्यान दे कि इन तीनों देवताओं को घर में एक साथ रखा जाए.

8- लव बर्डस :  इनको शयनकक्ष में दक्षिण- पश्चिम कोने पर रखा जाना चाहिये. लव बर्डस जीवन में प्रेम -पूर्ण सामंजस्य स्थापित करने में मदद करते हैं .

9- दर्पण : परिवार की सुख - समृ्द्धि व स्वस्थ जीवन के लिए दर्पण को भोजनकक्ष में ऐसे स्थान पर लगायें जहाँ भोजन करते समय प्रतिबिंब दिखाई दे.

10- एक्वेरियम : घर में एक छोटे से एक्वेरियम में सुनहरी मछलियाँ पालना, सौभाग्य वर्धक होता है .ध्यान रहे कि एक्वेरियम में आठ मछलियाँ सुनहरी और एक काले रंग की होनी चाहिये . इसको मुख्य द्वार के समीप न रखें.

11- बैटल विद डेथ : यदि आपके घर में कोई लंबे समय से बिमार है तो इसे उसके बिस्तर के पास रखने से विभिन्न प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है.

12- स्फटिक श्री यंत्र / स्फटिक पिरामिड/ क्रिस्टल बॉल :  इसको ईशान या उत्तर दिशा में रखने से कार्यक्षमता बढ़ती है व व्यवसाय में चमत्कारी वृ्द्धि होती है.





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आपके विचारों, टिप्पणियों, सलाहों  के इंतजार के साथ , आपका :

                                                     - ऋषभ शुक्ल




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Comments

  1. Pratibha Sharma3 April 2013 at 03:13

    Outstanding information on feng shui . I never saw such informative blog on interiors in the blogging world . You are too good Mr. Rishabh. Thanks !

    Pratibha Sharma

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  2. very nice blog .informative content .

    - Mayank Sharma

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  3. नारायणी राज3 April 2013 at 03:20

    सर्वश्रेष्ठ जानकारी फेंग शुई के बारे में इतनी बढ़िया तरीके से हमें अवगत कराने के लिए आपका आभार ऋषभ जी !
    - नारायणी राज

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  4. सूरज चतुर्वेदी3 April 2013 at 03:24

    बहुत ही जतन से लिखा गया लेख . आभार ऋषभ जी
    - सूरज चतुर्वेदी

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  5. मिनाक्षी चन्देल3 April 2013 at 03:24

    बढ़िया जानकारी . आभार !
    - मिनाक्षी चन्देल

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  6. Thanks for explaining the difference between feng shui and vastu shastra . This blog is truly informative .

    - Atul

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  7. Sushma Mukherji3 April 2013 at 03:29

    Very nice blog !! Congrats !!
    - Sushma Mukherji

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  8. रेखा जुगानी3 April 2013 at 03:35

    फेंगशुई के बारे में इतनी सहजता से बताने के लिए धन्यवाद .
    - रेखा जुगानी

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  9. आशीष त्रिपाठी3 April 2013 at 03:39

    बड़े ही काम की जानकारी . आभार
    - आशीष त्रिपाठी

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  10. This is absolutely fabulous. Thank you.

    Sumit Dutta

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  11. कुनिका शेट्टी3 April 2013 at 03:40

    बहुत ही बेहतरीन पठनीय जानकारी . बधाई .
    कुनिका शेट्टी

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  12. विनीत द्विवेदी3 April 2013 at 03:44

    ज्ञानवर्धक लेख . आभार ऋषभ जी .
    - विनीत द्विवेदी

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  13. Biswajeet Singh3 April 2013 at 03:45

    I have a lot of interest in vastu and feng shui and this info is really very interesting and useful . thanks Rishabh ji .

    Biswajeet Singh

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  14. मिताली कुलकर्णी3 April 2013 at 03:55

    अर्थपूर्ण लेख .

    मिताली कुलकर्णी

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  15. Excellent!

    Manisha Verma

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  16. awesome blog ..Informative and very useful article

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  17. Vasu Agnihotri3 April 2013 at 04:39

    well written and well presented article ..thanks Rishabh ji

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